आयुर्वेदगृह
प्राकृतिक स्वास्थ्य देखभाल
About Ayurvedgrah
आयुर्वेद का महत्व
ayurvedgrah उपचार पांच हजार साल पुरानी चिकित्सा पद्धति है, जो हमारी आधुनिक जीवन शैली को सही दिशा देने और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती है । आयुर्वेदिक उपचार में जड़ी बूटि सहित अन्य प्राकृतिक चीजों से उत्पाद, दवा और रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल होने वाले पदार्थ तैयार किए जाते हैं। आयुर्वेदिक दवा के इस्तेमाल से जीवन सुखी, तनाव मुक्त और रोग मुक्त बनता है। बीते 75 साल से ‘केरल आयुर्वेद’ भी आयुर्वेद पर आधारित सामान उप्लब्ध करा लोगों के जीवन को सुगम बनाने का काम कर रहा है।
कंपनी की वेबसाइट भी है, जहां आप ऐसे उत्पाद आसानी से पा सकते हैं, जिन्हें पूर्ण रूप से प्राकृतिक उत्पादों से बनाया जाता है। आयुर्वेद को 1976 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी आधिकारिक तौर पर मान्यता दी है। यह एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति है जो बीमारियों को ठीक करने में मदद करती है और त्वचा, बालों, शरीर और मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में सहायक होती है। आयुर्वेद केवल जप, योग, उबटन या तेल की मालिश के लिए नहीं है, इसका अध्ययन और अनुसंधान बहुत व्यापक है। इसमें हर स्वास्थ्य समस्या के मूल कारण को समझकर उसके इलाज पर काम किया जाता है। इसी कारण से आयुर्वेद को भारत के अलावा दुनियाभर में महत्वपूर्ण माना जाता है।
आयुर्वेद का इतिहास
ayurvedgrah एक प्राचीन चिकित्सा विज्ञान है जो कम से कम 5,000 वर्षों से भारत में प्रचलित है। इसका नाम संस्कृत के शब्द “अयुर” (जीवन) और “वेद” (ज्ञान) से आया है। यह प्राचीन चिकित्सा पद्धति पहले ही वेदों और पुराणों में उल्लिखित थी। ayurvedgrah आजकल आयुर्वेद को योग सहित अन्य पारंपरिक प्रथाओं के साथ एकीकृत किया जाता है। आयुर्वेद की खोज भारत में ही हुई और यहां अधिकांश लोग आयुर्वेद का उपयोग करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 1976 में इसे मान्यता भी दी है। ayurvedgrah यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा के सेंटर फॉर स्पिरिचुअलिटी एंड हीलिंग के अनुसार पश्चिमी दुनिया में भी ayurvedgrah का उपयोग बढ़ रहा है। लेकिन अब भी आयुर्वेद को वैकल्पिक चिकित्सा माना जाता है ।
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आयुर्वेदिक उपचार के लाभ
1. भूख लगने पर ही खाएं – जब आपका पिछला भोजन पूरी तरह से पच गया हो।
2. शांत और आरामदायक जगह पर खाना खाएं। खाना खाते समय किसी भी प्रकार की चिंता न करें। बैठकर ही खाना खाएं और खाते समय न टीवी, न किताब, न फोन, न लैपटॉप का उपयोग करें।
3. ayurvedgrah सही मात्रा में खाएं – हम सभी अलग-अलग हैं, अलग-अलग ज़रूरतें और अलग-अलग पेट के आकार और अलग-अलग पाचन शाक्ति के साथ पैदा हुए है। इसलिए अपने शरीर की सुनें और जरुरत के अनुसार ही भोजन करें।
4. ayurvedgrah में गर्म भोजन करें।
5. गुणवत्तापूर्ण भोजन करें – सुनिश्चित करें कि आपका भोजन रसदार या थोड़ा तेलयुक्त हो क्योंकि इससे पाचन में आसानी होगी और पोषक तत्वों के अवशोषण में सुधार होगा। ऐसे खाद्य पदार्थों से बचें जो बहुत अधिक सूखे हों।